कटक, 22 जुलाई: मानव शरीर में स्वयं को स्वस्थ करने की जन्मजात क्षमता होती है, अंतरराष्ट्रीय काइरोप्रैक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष तथा विश्वविख्यात काइरोप्रैक्टिक विशेषज्ञ दिवंगत डॉ. सिडनी ई. विलियम्स के उस प्रेरणादायी दर्शन से प्रेरित होकर ‘काइरोप्रैक्टिक इंडिया’ भारत में स्वास्थ्य शिक्षा और काइरोप्रैक्टिक पेशे के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात करने जा रहा है। काइरोप्रैक्टिक इंडिया ओड़िशा के कटकस्थित श्री श्री विश्वविद्यालय के सहयोग से देश का पहला पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा इन काइरोप्रैक्टिक साइंस (पिजिडिसिएस) प्रारंभ करेगा। यह भारत का पहला महाविद्यालय-स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रम होगा, जो काइरोप्रैक्टिक विज्ञान के अध्ययन, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए समर्पित है।
इस पाठ्यक्रम का विशेष फोकस मेरुदंड (स्पाइन) तथा स्नायु तंत्र (नर्वस सिस्टम) के स्वास्थ्य पर होगा। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में सितंबर 2026 से प्रारंभ होने वाला है। यह पहल भारत में काइरोप्रैक्टिक शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगी तथा प्रशिक्षित, योग्य और पेशेवर काइरोप्रैक्टर्स तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह मरीजों को स्वयं को काइरोप्रैक्टर बताने वाले अप्रशिक्षित एवं बिना लाइसेंस वाले व्यक्तियों की बढ़ती धोखाधड़ी से बचाने में भी सहायक होगी तथा सुरक्षित, नैतिक और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगी। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएँ, छात्रवृत्ति के अवसर तथा पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने के उपरांत शत प्रतिशत प्लेसमेंट की गारंटी प्रदान की जाएगी। प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा अनिवार्य होगी तथा संपूर्ण पाठ्यक्रम के दौरान सौ प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा, ताकि शैक्षणिक एवं व्यावसायिक उत्कृष्टता के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखा जा सके।
इस ऐतिहासिक पहल का स्वागत करते हुए श्री श्री विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष श्री आदेश गोयल, कुलपति प्रो. (डॉ.) तेजपरताप, कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तीर्थंकर घोष ने कहा कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा और भारत में स्वास्थ्य शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन तथा दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए काइरोप्रैक्टिक इंडिया एवं श्री श्री विश्वविद्यालय ने भारत सरकार से देश में काइरोप्रैक्टिक शिक्षा और इस पेशे के विकास एवं प्रोत्साहन हेतु सहयोग का अनुरोध किया है।