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चतरा/चंदवा: झारखंड के चतरा जिले के चंदवा क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची से कथित दुष्कर्म और इसके बाद आरोपी की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में आ गया है। घटना को लेकर इलाके में आक्रोश के बीच पुलिस कार्रवाई, पीड़िता की सुरक्षा, आरोपियों पर कार्रवाई और मॉब लिंचिंग जैसे गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले पर सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक उज्ज्वल दास ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए घटना को बेहद दुखद और निंदनीय बताया। विधायक ने कहा कि सबसे पहले यह सवाल उठता है कि आखिर 2 अगस्त की रात एक नाबालिग लड़की कैसे गायब हो गई और उसके बाद 3 अगस्त को परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
विधायक उज्ज्वल दास के मुताबिक, 2 अगस्त की रात नाबालिग लड़की के गायब होने के बाद उसके माता-पिता ने 3 अगस्त को पुलिस को इसकी सूचना दी। विधायक का आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद 4 अगस्त की सुबह बच्ची किसी तरह अपने घर पहुंची और उसने परिजनों को अपने साथ कथित तौर पर हुई घटना की जानकारी दी। विधायक ने बच्ची की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिस मां-बाप ने अपनी बेटी को जन्म दिया और उसका पालन-पोषण किया, उनके सामने बेटी की ऐसी हालत में वापसी बेहद पीड़ादायक रही होगी।
पीड़िता के बयान के बाद मामला और गरमाया
विधायक के अनुसार, 4 अगस्त को ही पीड़िता की ओर से पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई और मामला दर्ज हुआ। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। इसके बाद कथित आरोपी को भीड़ द्वारा पकड़कर उसके साथ मारपीट की गई।
इस घटनाक्रम में आरोपी गंभीर रूप से घायल हुआ और इलाज के लिए हजारीबाग ले जाए जाने की बात सामने आई, जहां उसकी मौत हो गई। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भी चतरा में किशोरी से दुष्कर्म के आरोप के बाद 22 वर्षीय संदिग्ध की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की जानकारी दी गई है।
विधायक उज्ज्वल दास ने मॉब लिंचिंग की घटना को भी स्पष्ट रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून किसी व्यक्ति या भीड़ को कानून अपने हाथ में लेकर हत्या करने की अनुमति नहीं देता।
हालांकि विधायक ने यह भी कहा कि घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश था और उसी आक्रोश में लोग अपना आपा खो बैठे। उन्होंने कहा कि किसी की भी बेटी के साथ ऐसी घटना हो, तो परिवार और समाज का आक्रोश समझा जा सकता है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।
अक्षय पांडे ने भी उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
इससे पहले भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और पूर्व मुखिया अक्षय पांडे ने भी मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
अक्षय पांडे ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दुष्कर्म के आरोप में जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन मॉब लिंचिंग या अन्य मामलों में निर्दोष लोगों को नहीं फंसाया जाना चाहिए।
अक्षय पांडे ने कथित तौर पर बड़ी संख्या में लोगों को मामले में आरोपी बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि पुलिस को पूरी जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों को सजा मिले और निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई न हो।
उन्होंने पीड़िता के परिवार की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यदि परिवार के माता-पिता जेल में हैं, तो नाबालिग बच्ची और उसके छोटे भाई-बहनों की देखभाल कौन करेगा। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को संरक्षण और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
चंदवा क्षेत्र की इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ नाबालिग के साथ कथित यौन अपराध की जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ आरोपी की भीड़ द्वारा हत्या के मामले की जांच भी पुलिस के सामने है।
ऐसे में अब निगाहें पुलिस और प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।
जनप्रतिनिधियों ने भी यही मांग उठाई है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो, किसी दोषी को बचाया न जाए और किसी निर्दोष व्यक्ति को सिर्फ भीड़ या राजनीतिक दबाव के आधार पर आरोपी न बनाया जाए।
नोट: इस खबर में नाबालिग से कथित दुष्कर्म और अन्य आरोपों का उल्लेख संबंधित जनप्रतिनिधियों के बयानों और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। नाl
